बताया जाता है कि 1996 में जब नीतीश कुमार केंद्र में अटल बिहारी वाजपेई सरकार में मंत्री थे तभी उनकी नजर आरसीपी सिंह पर पड़ी थी. उन्होंने रेल मंत्री बनने के बाद आरसीपी सिंह को अपना विशेष सचिव बना लिया. 2005 में जब बिहार विधानसभा चुनाव के बाद नीतीश कुमार मुख्यमंत्री बने, तो उन्होंने आरसीपी सिंह को दिल्ली से बिहार बुला लिया.
2005 से 2010 तक आरसीपी सिंह नीतीश कुमार के प्रधान सचिव के तौर पर कार्य करते रहे. 2010 में आरसीपी सिंह ने नौकरी से स्वैच्छिक सेवानिवृति ले ली और उन्होंने राजनीति में कदम रख दिया. 2010 में नीतीश कुमार ने आरसीपी सिंह को राज्यसभा भेज दिया. तब से अबतक आररसीपी सिंह जेडीयू में लगातार अपने आप को मजबूत करते रहे. बिहार की राजनीति में मजबूत छवि के साथ आज उनकी हैसियत पार्टी में नंबर दो की है.

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