हर 4 साल पर अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिता ओलंपिक आयोजित की जाती है...दुनिया भर के देश हिस्सा लेते हैं..करीब 300 से ज्यादा गोल्ड मेडल के लिए खिलाड़ी मैदान में उतरते हैं...भारत भी हर बार एक बड़े दल-बल के साथ प्रतियोगिता में हिस्सा लेता है...साल दर साल भारत इस प्रतियोगिता में एक नया इतिहास लिख रहा है...ओलंपिक की शुरुआत जब हुई थी तो भारत ने शानदार प्रदर्शन किया...लेकिन उसके बाद ग्राफ थोड़ा नीचे गया...फिर ऊपर नीचे होते होते वर्तमान समय में थोड़ा सा संतोषजनक है...
फ्रांस के शहर पेरिस में 2024 के ओलंपिक आयोजित किए जाएंगे...ओलंपिक में पहली बार भारत ने 1900 के पेरिस ओलंपिक खेलों में हिस्सा लिया, जहां नॉर्मन प्रिचर्ड देश के एकमात्र प्रतिनिधि के तौर पर शामिल हुए...उन्होंने 200 मीटर स्प्रिंट और 200 मीटर हर्डल रेस में दो रजत पदक जीते...
ओलंपिक में भारत का प्रदर्शन निराशाजनक नहीं रहा है...लेकिन इतनी बड़ी आबादी वाले देश में अगर पदक की बात करें तो उस लिहाज से थोड़ा कम दिखायी देता है...और हमें सोचने पर मज़बूर होना पड़ता है कि क्या सच में, भारत में प्रतिभा की कमी है या भारतीयों में प्रतिभा है ? बस उसे मौका नहीं दिया जाता या उसे दिखाया नहीं जाता है...
भारत की जनसंख्या सवा सौ करोड़ से ज्यादा है...दुनिया के कई ऐसे देश हैं जिनकी आबादी भारत से बहुत कम है... क्यूबा की जनसंख्या एक करोड़ है लेकिन गोल्ड लाने में वो हमसे आगे है...ऑस्ट्रेलिया जिसकी आबादी मात्र दो करोड़ लेकिन सोना लाने में वो भी अव्वल है...एशिया यूरोप और अफ्रीका के ऐसे बहुत से देश हैं...उनकी आबादी भारत की तुलना में बहुत ही कम है...लेकिन मेडल तालिका में वो हमसे ऊपर रहते हैं...
ये हमारे लिए शोध और सोच विचार करने वाली बात है कि, आखिर हम कहां पिछड़ कहां रहे हैं...ओलंपिक के अधिकतम मेडल व्यक्तिगत में होते हैं... ओलंपिक में लगभग 300 के करीब खेल प्रतियोगिताएं होती हैं मतलब कि 300 से ज़्यादा बार गोल्ड मेडल मिलने की संभावना लेकिन इन खेलों में सबसे ज़्यादा पदक तैराकी या पानी से जुड़े खेलों में होते हैं...
उसी प्रकार दूसरे नंबर पर एथलेटिक्स से जुड़ी खेल प्रतियोगिता जिसमें दौड़ना, उछल-कूद जैसे खेल शामिल हैं...इन खेलों में भी लगभग 17 से 18% मेडल होते हैं... इसी तरह जिमनास्टिक खेलों में लगभग 10 से 12% मेडल होते हैं...इन तीनों खेलों को मिला दिया जाए तो करीब आधे मेडल इनमें शामिल हो जाएंगे...
ये ऐसे खेल हैं जिसमें व्यक्तिगत रूप से खेल प्रतिभा का होना या प्रतिस्पर्धा को जीत पाने की व्यक्तिगत क्षमता महत्व रखती है...भारत अधिकतर जिन खेलों में कोई पदक जीत पाया है, वो खेल हैं हॉकी, पहलवानी, बॉक्सिंग और शूटिंग...टेनिस और बैडमिंटन में भी कुछ पदक पाए हैं...भारत ने इन खेलों में अब तक 9 गोल्ड पर कब्जा किया है...जिसमें से 8 गोल्ड सिर्फ हॉकी में ही मिले हैं...यानी साफ है कि, अगर हम टीम भावना से खेलते हैं तो सोना पर हमारा कब्जा तय माना जाता है...लेकिन व्यक्तिगत प्रतिस्पर्धा में हम अमूमन पीछे रह जाते हैं...
खेल प्रतिस्पर्धा का सेलेक्शन बहुत मायने रखता है...भारतीयों में प्रतिभा की कमी है या फिर हम प्रतिभाओं को मौका नहीं देते हैं...इतना ही नहीं ओलंपिक के माइंड गेम को भी हमें समझना होगा...यही कारण है कि, भारत से आबादी की तुलना में सैकड़ों गुना छोटे देश भी तैराकी, जिमनास्टिक और एथलेटिक्स खेल जैसी प्रतिस्पर्धा में हिस्सा लेकर अधिक से अधिक पदक जीत ले जाते हैं...
ऑस्ट्रेलिया की पदक तालिका पर गौर करेंगे तो भारत के मुकाबले, बहुत कम आबादी होने के बावजूद भी ये हर ओलंपिक में टॉप 10 की सूची में या टॉप पदक विजेता सूची में शामिल होता है...ऑस्ट्रेलिया की टीम मुख्य रूप से तैराकी, दौड़, जंपिंग, एथलेटिक्स और जिमनास्टिक जैसे खेलों में विशेष स्थान रखती है और अधिकतम गोल्ड और रजत पदक पर कब्जा करती है
अफ्रीका के कई देश, जिनको सामान्य रूप से हम भूगोल या जनरल नॉलेज की किताबों में ही पढ़ते हैं लेकिन पदक तालिका में वो शीर्ष स्थानों में पाए जाते हैं...अगर हमें ओलंपिक जैसी प्रतिस्पर्धा में पदकों की संख्या बढ़ानी है, गोल्ड मेडल की संख्या बढ़ानी है, रजत पदक की संख्या बढ़ानी है तो हमें व्यक्तिगत प्रतिभा वाले खेलों में भारतीयों की रूचि बनानी पड़ेगी...
तैराकी, एथलेटिक्स और जिमनास्टिक खेल, जिनमें अधिकतर पदक दांव पर लगाया जाता है, उन खेलों पर ध्यान देना पड़ेगा...खेल प्रेमी, खेल परिषद, खेल भावना से भरे देश के उद्योगपति , राजनीतिज्ञ और आम जनता इसमें रूचि लेंगे और और भारत को 2024 ना सही, लेकिन 2028 के ओलंपिक खेलों में पदक तालिका की शीर्ष सूची में शामिल करा पाएगी
आजादी के पहले भारतीय हॉकी टीम ने 1928 से 1936 तक ओलंपिक में अपना दबदबा बनाया और अभूतपूर्व तीन खिताब जीते...1928 के एम्स्टर्डम ओलंपिक में, भारत ने ऑस्ट्रिया, बेल्जियम, डेनमार्क और स्विट्जरलैंड को हराकर फाइनल में नीदरलैंड को 3-0 से हराकर अपना पहला स्वर्ण पदक जीता... 1932 के ग्रीष्मकालीन ओलंपिक में भारत ने यूएसए को 24-1 से हराया, जो ओलंपिक इतिहास में जीत का सबसे बड़ा अंतर था... 1936 के ग्रीष्मकालीन ओलंपिक फाइनल में उन्होंने जर्मनी को 8-1 से हराया, जो ओलंपिक फाइनल में जीत का सबसे बड़ा अंतर था...
1948 से स्वतंत्र भारत ने 50 से अधिक एथलीटों के प्रतिनिधिमंडल को भेजना शुरू किया... प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व शेफ-डी-मिशन कर रहे थे...भारतीय फील्ड हॉकी टीम ने फाइनल में ग्रेट ब्रिटेन को हराकर 1948 के ग्रीष्मकालीन ओलंपिक में स्वर्ण पदक जीता...ये आज के भारत के लिए पहला स्वर्ण पदक था... उन्होंने 1956 के ग्रीष्मकालीन ओलंपिक में फाइनल में पाकिस्तान को हराकर लगातार छठा खिताब जीतकर अपना दबदबा जारी रखा...1960 के ग्रीष्मकालीन ओलंपिक में फील्ड हॉकी टीम फाइनल हार गई और उसे रजत पदक से संतोष करना पड़ा... हालांकि टीम ने 1964 के ग्रीष्मकालीन ओलंपिक में स्वर्ण जीतकर वापसी की, भारत ने अगले दो ओलंपिक में कांस्य पदक जीता...1976 के ग्रीष्मकालीन ओलंपिक में भारत 1928 के बाद पहली बार खाली हाथ घर आया...
हॉकी के प्रति लोगों के जुनूनी दौर में टेनिस के प्रति लोगों का ध्यान भारत के टेनिस स्टार लिएंडर पेस ने आकर्षित किया... पेस अटलांटा ओलंपिक में पुरुष एकल स्पर्धा के सेमीफाइनल में पहुंचे... पेस सेमीफाइनल में आंद्रे अगासी के खिलाफ 7-6, 6-3 के स्कोर से हार गए थे... लगातार तीन ओलंपिक से पदक रहित वापसी करने के बाद भारत के लिए पदक एक बड़ी उपलब्धि थी...
पारंपरिक रूप से पुरुष-प्रधान खेल में, साक्षी मलिक महिला फ्री स्टाइल 58 किग्रा वर्ग में कांस्य पदक के साथ ओलंपिक पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला पहलवान बनीं...साक्षी मलिक की अब तक की सबसे बड़ी उपलब्धि 58 किग्रा भार वर्ग में रियो 2016 ओलंपिक में जीता गया ओलंपिक कांस्य पदक ही है...
केडी जाधव भारत को कुश्ती में पदक दिलाने वाले पहले पहलवान थे जिन्होंने 1952 के हेलसिंकी ओलंपिक में कांस्य पदक जीता था...उसके बाद सुशील ने बीजिंग में कांस्य और लंदन में रजत पदक हासिल किया...इसी परंपरा को टोक्यो ओलंपिक में रवि दहिया ने कायम रखा...उन्होंने रजत पदक अपने नाम किया...
2012 में लंदन ओलंपिक भारत का अब तक का सर्वश्रेष्ठ ओलंपिक प्रदर्शन रहा है...जिसमें कुल छह पदक हैं, जिसने पिछले खेलों के देश के रिकॉर्ड को दोगुना कर दिया...ये भारतीय खिलाड़ियों के लिए एक ऐतिहासिक मील का पत्थर था क्योंकि शटलर साइना नेहवाल और मुक्केबाज मैरी कॉम ने लंदन में अपने-अपने खेलों में कांस्य पदक जीता था...टोक्यो में भारतीय टीम ने ओलंपिक में स्वर्ण पदक का सूखा ख़त्म किया... टोक्यो में नीरज चोपड़ा ने भारत को स्वर्ण पदक दिलाया. ...नीरज चोपड़ा ने पहली बार ओलंपिक खेलों में भाग लिया था...साल 2008 में बीजिंग ओलंपिक में 26 साल की उम्र में अभिनव बिंद्रा ने देश को 10 मीटर एयर राइफल शूटिंग में गोल्ड मेडल दिया...अभिनव देश के एकमात्र ऐसे खिलाड़ी बन गए जिन्होंने व्यक्तिगत रूप से गोल्ड मेडल जीता... बीजिंग ओलंपिक में भारत ने एकमात्र पदक नहीं जीता था बल्कि देश मुक्केबाजी और कुश्ती में दो और पदकों के साथ लौटा था...राज्यवर्धन सिंह ने साल 2004 के एथेंस ओलिंपिक खेलों में देश के लिए पहला व्यक्तिगत सिल्वर मेडल जीतकर इतिहास रचा था। ओलिंपिक के इतिहास में पहली बार किसी खिलाड़ी को सिल्वर मेडल हासिल हुआ था...
ये भारत का ओलंपिक के इतिहास में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन है... लेकिन ये तो एक शुरुआत है, भारत को अभी बहुत लंबा सफर तय करना है...हमारे देश में प्रतिभाओं की कमी नहीं, बस एक सामूहिक और ईमानदार कोशिश की जरुरत है...उसके बाद तो देश में सोना ही सोना होगा....



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