"मुझे ये भी याद नहीं रहता, रंग कौन से मुझको प्यारे हैं
मेरी शौक पसंद मेरी, बिन तेरे सब बंजारे हैं"
मनोज मुंतशिर की ये लाइनें इस वक्त बिहार की सियासत या यूं कहें कि, उपेंद्र कुशवाहा पर बिलकुल सटीक बैठती है...'जेडीयू से कब बाहर निकला, और नीतीश कुमार से कब मैं अलग था'...ये बयान देकर उपेंद्र के दिल की बात जुबां पर आ गई है....सियासत के 'स' ताल्लुक रखने वाले समझ चुके हैं कि, कुशवाहा क्या चाहते हैं...कहते हैं सियासत में कुछ भी हो सकता है...क्योंकि मतभेद में गुंजाइश बनी रहती है...मनभेद में गुंजाइश थोड़ी कम रहती है...उपेंद्र कुशवाहा
का नीतीश से मतभेद था, मनभेद नहीं...बहुत दिनों तक अपने दोस्त से जुदा होने के बाद अब वो दोस्त के गले लगने को बेकरार हैं...होली दहलीज पर है...और कहते हैं न कि होली में हर गिले शिकवे दूर हो जाते हैं...लोग हर पुरानी बात को भूल कर एक दूसरे के गले लगते हैं...बस इसी बात तो उपेंद्र कुशवाहा चरितार्थ करने जा रहे हैं...
नीतीश ने हमेशा दिया सम्मान
नीतीश कुमार ने उपेंद्र कुशवाहा को हमेशा से सम्मान दिया है...2004 में कुशवाहा को नेता प्रतिपक्ष बनाकर ये संदेश दिया कि, उपेंद्र उनके दिल के कितने करीब हैं...2010 में राज्यसभा भेजा तो फिर से अपने बड़प्पन का परिचय नीतीश कुमार ने दिया..
उपेंद्र का लक्ष्य था नीतीश के पैरलर खड़ा होना
जिस नीतीश कुमार ने हमेशा उपेंद्र कुशवाहा को इज्जत बख्शी...उस उपेंद्र कुशवाहा ने जब जब जेडीयू का दामन छोड़ा...तब तब नीतीश कुमार के पैरलर खड़े होने की कोशिश की...मानव श्रृंखला हो या फिर शिक्षा या सामाजिक कुरितियां...हर मुद्दे पर उपेंद्र कुशवाहा ने नीतीश के अंगेस्ट में अपनी राजनीतिक दीवार मजबूत करने कोशिश...और हर बार नाकामी हाथ लगी...नीतीश से सियासी दुश्मनी के चक्कर में उनकी पार्टी में न कोई विधायक बचा और न ही कोई सांसद...यहां तक की वो खुद भी संसद और विधानसभा के परिसर से दूर हो गए...
एक नजर उपेंद्र कुशवाहा के सियासी सफर पर
उपेंद्र कुशवाहा 1985 में राजनीति में प्रवेश किए...1988 तक युवा लोकदल के राज्य महासचिव रहे...फिर 1988 से 1993 तक राष्ट्रीय महासचिव की जिम्मेदारी मिली...1994 में समता पार्टी का महासचिव बने...2000 में पहली बार बिहार विधानसभा के सदस्य बने...2004 में नीतीश ने नेता प्रतिपक्ष बनाया...2005 से नीतीश से रिश्तों में खटास आई...उपेंद्र कुशवाहा ने जेडीयू से रिश्ता तोड़ लिया...नेशनल कांग्रेस पार्टी में शामिल हो गए...2009 फिर से जेडीयू में वापस आए...2010 में बने राज्यसभा सदस्य...नीतीश से फिर से रिश्तों में खटास आई...राज्यसभा का कार्यकाल नहीं हुआ पूरा...राज्यसभा से कुशवाहा ने इस्तीफा दे दिया...कुशवाहा ने 2013 में RLSP का गठन किया...फरवरी 2014 को NDA में शामिल हो गए...2014 के लोकसभा चुनाव में तीन सीटें जीती...मोदी कैबिनेट में मानव संसाधन विकास राज्य मंत्री रहें...2019 लोकसभा चुनाव से पहले NDA से नाता टूटा...NDA से अलग होने के बाद महागठबंधन में शामिल हुए...2019 लोकसभा चुनाव में दो जगहों से लड़े, दोनों जगह हारे...लोकसभा चुनाव में RLSP को एक भी सीट नहीं मिली...2020 में महागठबंधन से अलग होकर विधानसभा लड़ेविधानसभा चुनाव में पार्टी का खाता भी नहीं खुला....
सियासी जमीन पर कुशवाहा ने हर पिच पर खेला...हर खिलाड़ी के साथ जोड़ी बनाई...लेकिन नीतीश जैसा न तो दोस्त मिला न ही जोड़ीदार...और न ही जेडीयू जैसी सम्मान वाली पार्टी...इसीलिए अब वो फिर से घर लौट रहे हैं...शायद वो यही कहना चाह रहे हैं कि, तेरे जैसे यार कहां, कहां ऐसा याराना...
