उत्तर प्रदेश...विधानसभा चुनाव की दहलीज़ पर खड़ा है...सियासी रण जीतने की
जद्दोजहद में सभी पार्टियां लगी हैं... इन सबके बीच सीएम अखिलेख के एक्शन
अवतार ने सबको चौंका दिया...मुख्यमंत्री ने सोमवार को एक घंटे के अंदर अपने
दो मंत्रियों को बर्खास्त कर दिया...जिन दो मंत्रियों पर गाज़ गिरी उनके
नाम गायत्री प्रजापति और राजकिशोर सिंह हैं...अमेठी के रास्ते लखनऊ
पहुंचकर...खनन मंत्रालय संभालने वाले गायत्री प्रजापति को बर्खास्त करने के
पीछे सबसे बड़ी वजह...इलाहाबाद हाईकोर्ट का वो आदेश माना जा रहा
है...जिसमें प्रदेश में अवैध खनन को लेकर सीबीआई जांच के आदेश हुए
हैं....बस्ती के हरैया से विधायक राजकिशोर सिंह पर भी भ्रष्टाचार और बस्ती
में जमीन कब्जा करने के आरोप लगे थे...ऐसा नहीं है कि, ये एक्शन पहली
मर्तवा दिखा...इससे पहले भी सीएम ने करीब 15 मंत्रियों पर बर्खास्तगी की
तलवार चलायी थी...इसके अलावा उन्होंने कई मंत्रियों के विभागों में फेरबदल
किया...जिसमें राजा भैया जैसे हस्ती का नाम शामिल था...अखिलेश के इस सटीक
सियासी यॉर्कर को विपक्षी दागदार दामन से कुछ धब्बे निकालने का नाम दे रहे
हैं...कहा तो ये भी जा रहा है कि, अखिलेश को दोबारा सत्ता में वापसी पर
सस्पेंस है...लिहाजा वो समाजवाद की ज़मीन को साफ करने में लगे
हैं...आरोप-प्रत्यारोप के बीच समाजवादी पार्टी के मुखिया मुलायम सिंह यादव
से जब इस कार्रवाई के बारे में पूछा गया तो उन्होंने इस मामले से खुद को
अनजान बताया...लेकिन नेताजी के इस सच पर य़कीन करना मुश्किल हो रहा
है...सियासी इमेज को लेकर अखिलेश को सिर्फ अपने मंत्रियों से ही परेशानी
नहीं है...बल्कि, संगठन से उनका संघर्ष भी जगजाहिर हो चुका है...मुलायम
सिंह यादव भी सपाइयों के दबंगई को लेकर कई बार बोल चुके हैं...सरकार के
कामकाज को लेकर नाखुशी का इजहार भी कर चुके हैं...कौमी एकता दल के मसले पर
चाचा शिवपाल से अखिलेश का टशन खूब चर्चा में रहा...नेताजी के दखल के बाद
अंसारी बदर्स का मसला ठंडा हुआ...समाजवादी पार्टी के ताकतवार नेता और
कैबिनेट मंत्री आज़म खान के अजब बोल भी अखिलेश सरकार को परेशान करता रहता
है...लॉ एंड ऑर्डर के मसले पर समाजवाद की सरकार हमेशा बैकफुट पर रही
है...सरकार के करीब साढ़े चार साल पूरे हो चुके हैं...सियासी पिच पर स्लॉग
ओवर चल रहा है...ऐसे में अखिलेश भी जानते हैं कि, विकास के दावे उस वक्त
दब जाते हैं...जब भ्रष्टाचार और दामन के दागदार होने की ख़बरें आती
हैं...लिहाजा इस दलदल में फंसने की गलती सरकार नहीं करना चाहती...समाजवाद
की ज़मीन पर साइकिल चलती रहे...इसके लिये ज़रूरी है सरकार की इमेज को
दागदार बनाने के बजाए दमदार बनाया जाए...
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