मंगलवार, 16 नवंबर 2021

वीर कुंवर सिंह जैसे योद्धा विरले ही होते हैं



 

80 साल की उम्र में  लड़ने और विजय हासिल करने के लिए अगर किसी शख्स का नाम लिया जाता है तो वो हैं वीर कुंवर सिंह...वीर कुंवर सिंह का जन्म 13 नवंबर 1777 को बिहार के भोजपुर जिले के जगदीशपुर गांव में हुआ था....वीर कुंवर सिंह सन 1857 के प्रथम भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के सिपाही और महानायक थे...अन्याय विरोधी और स्वतंत्रता प्रेमी बाबू कुंवर सिंह कुशल सेना नायक थे...


पारिवारिक परिचय

वीर कुंवर सिंह के पिता बाबू साहबजादा सिंह प्रसिद्ध शासक भोज के वंशजों में से थे...उनकी माताजी का नाम पंचरत्न कुंवर था....उनके छोटे भाई अमर सिंह, दयालु सिंह और राजपति सिंह और इसी खानदान के बाबू उदवंत सिंह, उमराव सिंह,  गजराज सिंह नामी जागीरदार रहे....ये परिवार अपनी आजादी कायम रखने के खातिर सदा लड़ने के लिए जाना गया...


गजब की थी नेतृत्व क्षमता

1857 में अंग्रेजों को भारत से भगाने के लिए हिंदू और मुसलमानों ने मिलकर कदम बढ़ाया...मंगल पांडे की बहादुरी ने सारे देश में विप्लव मचा दिया... बिहार की दानापुर रेजिमेंट, बंगाल के बैरकपुर और रामगढ़ के सिपाहियों ने बगावत कर दी...मेरठ, कानपुर, लखनऊ, इलाहाबाद, झांसी और दिल्ली में भी आग भड़क उठी... ऐसे हालात में बाबू कुंवर सिंह ने अपने सेनापति मैकु सिंह और भारतीय सैनिकों का नेतृत्व किया...


27 अप्रैल 1857 को दानापुर के सिपाहियों, भोजपुरी जवानों और अन्य साथियों के साथ आरा नगर पर बाबू वीर कुंवर सिंह ने कब्जा कर लिया...अंग्रेजों की लाख कोशिशों के बाद भी भोजपुर लंबे समय तक स्वतंत्र रहा...जब अंग्रेजी फौज ने आरा पर हमला करने की कोशिश की तो बीबीगंज और बिहिया के जंगलों में घमासान लड़ाई हुई...बहादुर स्वतंत्रता सेनानी जगदीशपुर की ओर बढ़ गए...आरा पर फिर से कब्जा जमाने के बाद अंग्रेजों ने जगदीशपुर पर आक्रमण कर दिया...बाबू कुंवर सिंह और अमर सिंह को जन्म भूमि छोड़नी पड़ी...अमर सिंह अंग्रेजों से छापामार लड़ाई लड़ते रहे और बाबू कुंवर सिंह रामगढ़ के बहादुर सिपाहियों के साथ बांदा, रीवा, आजमगढ़, बनारस, बलिया, गाजीपुर और गोरखपुर में विप्लव के नगाड़े बजाते रहे...


वीर कुंवर सिंह ने 23 अप्रैल 1858 में जगदीशपुर के पास अंतिम लड़ाई लड़ी...ईस्ट इंडिया कंपनी के भाड़े के सैनिकों को इन्होंने पूरी तरह खदेड़ दिया... उस दिन बुरी तरह घायल होने पर भी इस बहादुर ने जगदीशपुर किले से गोरे पिस्सुओं का यूनियन जैक नाम का झंडा उतार कर ही दम लिया...वहां से अपने किले में लौटने के बाद 26 अप्रैल 1858 को इन्होंने वीरगति पाई...

शुक्रवार, 12 नवंबर 2021

मिथिलांचल में 365 दिन की 'उड़ान'


 दरभंगा एयरपोर्ट अपनी उड़ान सेवा के सफर का एक साल पूरा कर चुका है...पिछले साल 8 नवंबर को यहां से उड़ान सेवा की शुरुआत हुई थी...इतने कम समय में इस एयरपोर्ट ने पूरी सुविधाएं बहाल नहीं होने के बावजूद कई उपलब्धियां हासिल कर ली हैं... रीजनल कनेक्टिविटी स्कीम के तहत देश में दरभंगा सहित 63 शहरों में एयरपोर्ट खोले गए थे... इन 63 एयरपोर्ट्स में यात्रियों के आने-जाने मामले में दरभंगा लगातार नंबर वन पर  है... 


बिहार में हवाई सेवा की अपार संभावनाएं हैं... केंद्र सरकार ने भी बिहार को एविएशन मैप पर लाने की योजना बनाई है... पटना और गया जैसे शहरों के अलावा छोटे शहरों में भी हवाई यात्रियों की संख्या लगातार बढ़ रही है... तभी तो महज चंद महीने में ही दरभंगा एयरपोर्ट ने यात्रियों के मामले में उम्मीद से बेहतर प्रदर्शन किया है... दरभंगा एयरपोर्ट ने हवाई यात्रियों के मामले में देश के 63 नए एयरपोर्ट्स को पीछे छोड़ दिया है... 


कमाई में नंबर वन

मोदी सरकार ने रीज़नल कनेक्टिविटी स्कीम के तहत देश में 63 नए एयरपोर्ट खोले हैं... दरभंगा में 8 नवंबर 2020 को एयरपोर्ट की शुरूआत हुई थी... सभी 63 नए एयरपोर्ट्स की तुलना में दरभंगा आने और जाने वाले यात्रियों की संख्या सबसे ज्यादा है... पिछले 11 महीने में इस एयरपोर्ट से तकरीबन 4.60 लाख यात्रियों ने टेक ऑफ और लैंड किया है... इस एयरपोर्ट पर दिन 2000 से 2200 यात्री आते-जाते हैं... इस एयरपोर्ट से नॉर्थ बिहार के 18 जिलों और नेपाल के यात्रियों को भी सुविधा हुई है...   


पीएम मोदी का गिफ्ट

दरभंगा को एयरपोर्ट का तोहफा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिया था... हाल ही में इस एयरपोर्ट के विकास के लिए ज़मीन अधिग्रहण का रास्ता भी साफ हो गया है... योजना के तहत नीतीश कैबिनेट ने 336 करोड़ 76 लाख की राशि स्वीकृत की है... इससे 78 एकड़ भूमि का अधिग्रहण किया जाएगा... इससे  पहले 31 एकड़ भूमि अधिग्रहण करने का प्रस्ताव था, जिसे बढ़ाकर अब 78 एकड़ कर दिया गया है... विस्तार के बाद कुहासे में भी हवाई जहाज उतर सकेंगे... इसके बाद दरभंगा एयरपोर्ट से सालों भर हवाई जहाज का आना-जाना हो सकेगा... फिलहाल दरभंगा एयरपोर्ट से अहमदाबाद, बेंगलुरु, हैदराबाद, दिल्ली, कोलकाता और मुंबई के लिए उड़ानें उपलब्ध हैं...  आने वाले समय में यहां नाइट लैंडिंग समेत वह सभी सुविधाएं होंगी जो किसी भी इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर हैं... ये उत्तर बिहार खासकर मिथिला के विमानन सुविधा में मील का पत्थर साबित होगा... 


केंद्र की दिलचस्पी

केंद्र सरकार ने पिछले दिनों मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को पत्र लिख कर बिहार के 5 एयरपोर्ट्स को डेवलप करने के लिए सहयोग की मांग की थी... नागरिक उड्डयन मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने नीतीश कुमार को लिखे पत्र में दरभंगा एयरपोर्ट का भी ज़िक्र किया था... .दरभंगा एयरपोर्ट का संचालन फिलहाल एयरफोर्स की 22 एकड़ जमीन पर किया जा रहा है... इस जमीन को पांच वर्ष के लिए लीज पर लिया गया है... एयरपोर्ट अथॉरिटी और रक्षा मंत्रालय से इस एयरपोर्ट से एक दिन में 20 विमानों के लैंड और टेक ऑफ की अनुमति है... लेकिन फिलहाल यहां से हर दिन 10 से 12 विमानों का आना-जाना हो रहा है..दरभंगा एयरपोर्ट से दुबई के लिए भी कनेक्टिंग फ्लाइट की सुविधा उपलब्ध हो गई है... 


मिथिलांचल का कारोबार बढ़ा

एयरपोर्ट बन जाने से मिथिलांचल का कारोबार भी बढ़ा है... इस बार कार्गो विमान से दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरू और हैदराबाद के लोगों ने मिथिलांचल की शाही लीची का स्वाद चखा... बेंगलुरू का धनिया पत्ता यहां अपनी खुशबू बिखेर रहा है..इस बार 36 टन लीची इन शहरों में भेजी गई... कार्गो के जरिये यहां प्रति दिन तीन से चार टन धनिया आ रहा है...अगले साल से यहां का प्रसिद्ध मखाना, मछली और पान को देश के अलग-अलग हिस्सों में भेजने की योजना है... राज्य में एविएशन सेक्टर में अपार संभावनाएं नज़र आ रही हैं... और आने वाले दिनों में मिथिलांचल के यात्रियों को भी बड़ी उम्मीदें हैं... 

ओलंपिक में भारत की आशाएं

हर 4 साल पर अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिता ओलंपिक आयोजित की जाती है...दुनिया भर के देश हिस्सा लेते हैं..करीब 300 से ज्यादा गोल्ड मेडल के लिए खिल...