मंगलवार, 20 जुलाई 2021

235 साल का गोलघर

 पटना का गोलघर ऐतिहासिक धरोहर है...इसे बिहार का शान कहा जाता है...पटना की पहचान है गोलघर...पटना में गांधी मैदान के पश्चिम में स्थित है गोलघर...20 जुलाई 2021 को ये गोलघर 235 साल का हो गया है...गोलघर को 1979 में राज्य संरक्षित स्मारक घोषित किया गया...

क्यों बनाया गया गोलघर?

1770 में आई भयंकर सूखे के दौरान करीब एक करोड़ लोग भुखमरी के शिकार हुए थे...तभी तत्कालीन गवर्नर जनरल वारेन हेस्टिंग ने गोलघर के निर्माण की योजना बनाई.... ब्रिटिश इंजिनियर कप्तान जॉन गार्स्टिन ने अनाज के भंडारण के लिए  गोल ढांचे का निर्माण 20 जनवरी 1784 को शुरू किया...ब्रिटिश फौज के लिए इसमें अनाज सुरक्षित रखने की योजना थी...इसका निर्माण कार्य ब्रिटिश राज में 20 जुलाई 1786 को पूरा हुआ...इसमें एक साथ 1,40,000 टन अनाज रखने की क्षमता है...

क्यों ख़ास है गोलघर?

गोलघर का आकार 125 मीटर है...इसकी ऊंचाई 29 मीटर है...इसमें कोई पिलर नहीं है... इसकी दीवारें आधार में 3.6 मीटर मोटी है...गोलघर के हाइट यानी शिखर पर करीब तीन मीटर तक ईंट की जगह पत्थरों का इस्तेमाल किया गया है...गोलघर के शीर्ष पर दो फीट 7 इंच व्यास का छिद्र अनाज डालने के लिये छोड़ा गया था...जिसे बाद में भर दिया गया...इसमें 145 सीढियां हैं...जिसके सहारे आप इसके ऊपरी सिरे पर जा सकते हैं...जहां से पटना के शहर के एक बड़े भाग और गंगा के विहंगम दृश्य को देख सकते हैं...गुम्बदाकार आकृति के कारण इसकी तुलना 1627-55 में बने मोहम्मद आदिल शाह के मकबरे से की जाती है...गोलघर के अंदर एक आवाज 27-32 बार प्रतिध्वनित होती है...जो अपने आप में अद्वितीय है...


पटना आने वाले एक बार जरूर इस ऐतिहासिक धरोहर का दीदार करते हैं...ये एक प्रमुख पर्यटक स्थल है...यहां पर संगीत फव्वारा का भी इंतजाम किया गया है...अगर आपने  अभी तक इसको नहीं देखा तो जरूर देखिए...

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