रविवार, 11 जुलाई 2021

पशुपति बने 'पारस'


 पशुपति कुमार पारस बिहार की राजनीति  का सीधा-साधा और सरल चेहरा. चंद दिनों पहले तक पशुपति पारस की पहचान केवल और केवल रामविलास पासवान  के छोटे भाई के रूप में होती थी. 12 जुलाई 1952 को खगड़िया के शाहरबन्नी गांव में जन्मे पशुपति पारस तीनों भाइयों में दूसरे नंबर के हैं. भाई रामविलास पासवान की छत्रछाया में राजनीतिक जीवन की शुरुआत करने वाले पशुपति पारस 1977 में पहली बार अलौली से विधायक बने और फिर पीछे मुड़कर नहीं देखा. बिहार सरकार में तीन टर्म मंत्री रहने वाले पशुपति पारस वर्तमान में हाजीपुर से सांसद हैं.

पशुपति पारस पिछले महीने बिहार की राजनीति में तब हॉट टॉक बन गए जब उन्होंने भतीजे चिराग पासवान पर तानाशाही का आरोप लगाया. फिर पार्टी के चार सांसदों के समर्थन से लोकसभा में एलजेपी संसदीय दल के नेता बन गए. इतना ही नहीं पशुपति पारस ने एलजेपी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक बुलाई और एलजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष बन गए. पशुपति पारस के पास फिलहाल अपने जीवन का सबसे बड़ा पद है. साथ में सबसे बड़ी जिम्मेदारी भी. देखना ये होगा कि अपने भाई रामविलास पासवान की तरह पशुपति पारस एलजेपी को मजबूत करने में कितना सफल होते हैं.

पशुपति पारस का राजनीतिक सफर

1977 में पहली बार अलौली से विधायक बने

1985,1990, 1995, 2000, फरवरी 2005, नवंबर 2005 में विधायक

2017 से 2019 तक MLC

1900 से 1995 तक वन एवं पर्यावरण राज्यमंत्री

1995 से 1997 तक गृह कारा एवं निबंधन मंत्री

2017 से 2019 तक मत्स्य एवं पशुपालन मंत्री

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