बुधवार, 7 अप्रैल 2021

दगाबाज राइफल...!

 यूं ही कोई बेवफा नहीं होता, कुछ तो मजबूरियां रही होगी...ये बातें इन दिनों बिहार पुलिस पर सटीक बैठती है...अब आप पूछेंगे ऐसी क्या बात हो गई...जो बात बेवफाई तक पहुंच गई...तो आइये  आपको विस्तार से बता ही देते हैं...दरअसल एक नहीं कई ऐसे मौके आए हैं...जब बिहार पुलिस सब कुछ ठीक ठाक करने की सोचती है...तो उसकी सोच पर पानी फिर जाता है...इस बार भी 5  अप्रैल को ऐसा ही हुआ...मौका था AIMPLB के महासचिव और खानकाह रहमानी मुंगेर के सज्जाद नशीन हजरत मौलाना वली रहमानी को मुंगेर के खानकाह परिसर में सुपुर्दे खाक करने  का...राजकीय सम्मान के साथ उन्हें विदाई देनी थी...तैयारी भी पूरी थी...लेकिन जब बात राइफल से गोली निकलने की आई तो सबकुछ चौपट हो गया...राइफल ऐन वक्त पर धोखा दे गया...गोली  ही नहीं चली...बड़ी किरकिरी हो गई...किसी तरीके से दस में से चार राइफल से गोली निकली और कोरम पूरा किया गया...

सवाल ये उठने लगा कि, गलती किसकी थी...राइफल दगाबाज निकला या फिर चलाने वाला ही अनट्रेंड था...ये जांच का विषय है...जांच बिठा भी दी गई है...रिपोर्ट आएगी तो गाज गिराई  जाएगी...कार्रवाई जब होगी तब देखी जाएगी...लेकिन ये कोई पहला मौका नहीं था जब राजकीय सम्मान में सलामी के वक्त राइफल से गोली नहीं निकली...

कब कब नहीं निकली राइफल से गोली

21 अगस्त 2019 को बिहार के तीन बार मुख्यमंत्री रहे डॉक्टर जगन्नाथ मिश्रा का सुपौल जिले के पैतृक गांव बलुआ में अंतिम संस्कार हुआ...राजकीय सम्मान के तहत उन्हें 21 बंदूकों की  सलामी दी जानी थी...लेकिन ये पूर्व मुख्यमंत्री की बदकिस्मती कहिए या फिर पुलिस के जवानों का अनट्रेंड होना और नहीं तो ये भी कह सकते हैं कि, सारा दोष राइफल का ही था...एक भी  राइफल से गोली नहीं निकली...यहां भी जांच की बात कहकर खानापूर्ति कर दी गई...

6 फरवरी 2020 को जम्मू कश्मीर में आतंकियों से लोहा लेते हुए शहीद हुए सीआरपीएफ के जवान रमेश रंजन को अंतिम विदाई देने के वक्त भी बंदूक से गोली नहीं निकली...भोजपुर जिले के  जगदीशपुर इलाके में वीर सपूत को नमन करना था...लेकिन राइफल टांय टांय फिस्स हो गया...वो तो वहां पर लाज बचा ली सीआरपीएफ के जवानों ने जिन्होंने अपने साथी को इंसास राइफल से  सलामी दे दी...हमारे बिहार पुलिस के जवान तो कंधे पर बंदूक धरे के धरे ही रह गए...

बिहार में पुलिस ट्रेनिंग सेंटर

बिहार पुलिस को ट्रेनिंग देने के लिए राज्य में तीन ट्रेनिंग सेंटर हैं...

1. भागलपुर के नाथनगर में सिपाही प्रशिक्षण केन्द्र 

2. राजगीर पुलिस अकादमी

3. डुमरांव मिलिट्री पुलिस ट्रेनिंग सेंटर 

बदलाव की तैयारी

बिहार पुलिस के जवानों को और चुस्त दुरुस्त बनाने के लिए बिहार पुलिस के एक्सपर्ट के साथ-साथ आर्मी और पैरामिलिट्री फोर्स के अफसरों से भी ट्रेनिंग मिलेगी...बेसिक ट्रेनिंग के लिए 9  केन्द्रों का चयन किया गया है...रीजनल ट्रेनिंग सेंटरों के अलावा कांस्टेबल ट्रेनिंग स्कूल सिमुलतला का चयन भी हुआ है...फिलहाल ये बीएमपी-11 जमुई में रीजनल ट्रेनिंग सेंटर के तौर पर काम  कर रहा है...इसके अलावा डेहरी ऑन सोन, जमालपुर, मुजफ्फरपुर, दरभंगा, सुपौल, डुमरांव और कटिहार स्थित बीएमपी बटालियन के रीजनल ट्रेनिंग सेंटर में होगा...

उम्मीद करते हैं कि, इस बदलाव से अब आगे न राइफल पर दगाबाजी का इल्जाम लगेगा...और न ही पुलिसकर्मियों के ट्रेनिंग पर सवाल उठेंगे...


1 टिप्पणी:

  1. ऐसी घटनाएं पुलिस की ट्रेनिंग और तैयारी पर सवाल खड़े करती है.. जब पुलिस ऐसे मौके पर चूक जाती है तो अपराधियों से कैसे निपटेगी.. इसका अंदाजा लगाया जा सकता है.

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