
वक़्त कभी रुकता नहीं.वो चलता आया है.और चलता रहेगा.इसीलिए बेहतर यही होगा कि.हम और आप भी इसकी रफ़्तार से अपनी रफ़्तार मिला ले.माना की २१ वी सदी का पहला दशक काफी कड़वा अनुभव दे गया.पर ये भी सुच है कि आदमी समस्या और परेशानी झेलने के बाद ही सीखता है.क्योकि.अगर समस्या न हो गम का अहसास नहीं होगा.और गम का अहसास नहीं होगा तो ख़ुशी का अहसास नहीं होगा.तो समझदारी इसी में है कि । बीते हुए कल को आज में घोल दे.और आने वाले कल के लिए एक ऐसा माहोल तैयार करें जहाँ खुशिया ही खुशिया हो.गम और मायूसी की कोई जगह न हो.आइये २०११ का स्वागत करें.और अपने भविष्य के लिए नए सपने संजोये उसे पूरा करें.
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