शनिवार, 16 अक्टूबर 2021

मन और सेहत दोनों के लिए खास है मिथिला का मखाना (वर्ल्ड फूड डे पर विशेष)

 



वर्ल्ड फूड डे पर बात करते हैं विश्व प्रसिद्ध मखाना की...जो मिथिलांचल की पहचान है...मन को भाने वाले मखाना का मुरीद हर कोई है...देश के अलावा विदेशों में भी इसकी खासी डिमांड है...


सेहतमंद है मखाना

मखाना का खीर तो बनता ही है...साथ ही साथ इसको लोग घी में भूनकर भी खाते हैं...नाश्ते से से लेकर व्रत त्योहार तक में इसका उपयोग होता है...इसीलिए इसे सुपरफूड कहा जाता है...मखाना को डाइट में भी शामिल लोग करते हैं...ये सेहत और फिटनेस के लिए एक अच्छा आहार है... इसलिए न सिर्फ भारत में बल्कि दूसरे देशों में भी मखाना काफी अधिक प्रचलित है...मखाना की खेती बिहार के मधुबनी, दरभंगा, फारबिसगंज और पूर्णिया जिला में सबसे ज्यादा होती है...


मखाना के गुण के बारे में जानिए

मखाना कार्बोहायड्रेट, फाइबर, पौधा आधारित प्रोटीन और मैग्नीशियम, पोटेशियम, जिंक जैसे न्यूट्रिएंट का भी अच्छा साधन है... 

इसमें कोलेस्ट्रॉल, फैट और सोडियम की मात्रा कम होती है और इसलिए ये एक अच्छे स्नैक का विकल्प है...साथ ही, इनमें मैग्नीशियम की मात्रा ज्यादा होती है और सोडियम की कम...इसीलिए हाई ब्लड प्रेशर, मोटापे और दिल  से संबंधित परेशानियों से जूझ रहे लोगों को इसे अपनी डाइट में शामिल करना चाहिए...मखाना का ग्लाइसेमिक इंडेक्स कम होता है और इसलिए डायबिटीज के मरीज भी डॉक्टर की सलाह पर मखाना या इससे बने उत्पाद अपनी डाइट में ले सकते हैं...इसमें एक ‘एंटी एजिंग एंजाइम’ भी होता है, जो ख़राब प्रोटीन को सही करने में मदद करता है...मखाना ग्लूटन-फ्री होता है...और इसमें प्रोटीन और फाइबर की ज्यादा मात्रा होती है...मखाना में कैलरी भी कम होती है और इसीलिए वजन कम करने पर मेहनत कर रहे लोग भी इन्हें अपनी डाइट में शामिल कर सकते हैं... 


मखाना का पुराना है इतिहास

करीब 200 साल पहले से भारत में मखाना की खेती हो रही है...और तब से ही ये भारत में आयुर्वेद का हिस्सा है...भारतीय आयुर्वेद के अलावा, चीन में भी पारंपरिक औषधियां तैयार करने में सालों से इसका प्रयोग किया जा रहा है...


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