इतना सब कुछ हो गया बावजूद इसके वो चुप रहे. सियासी दांव चलने के लिए वक्त की ओर देखने लगे. संगठन को मजबूत करने में जुट गए. इसकी शुरुआत उन्होंने खुद अध्यक्ष पद छोड़कर की. आरसीपी को पार्टी को कमान दी, जो रणनीति बनाने में माहिर हैं. वक्त बीतता गया और देखते ही देखते उन्होंने ऐसे मास्टरस्ट्रोक पर काम किया, जिसने सबको हैरान कर दिया. और तो और चिराग के पैरों तले से जमीन खिसका दी. 208 एलजेपी नेताओं को अपने पाले में करके दिखा दिया कि सियासत में अभी भी वो चिराग के 'गुरु' हैं.
जेडीयू ने एलजेपी के बंगले में ऐसी सेंध लगाई कि एक झटके में ऊपर से नीचे तक खाली हो गया. तीर से बंगला को धराशायी कर दिया. चिराग खुद को पीएम मोदी का 'हनुमान' कहते थे. उस 'हनुमान' की पूरी सेना को नीतीश के अपने पाले में कर दिया. अब पासवान फैमिली के अलावा पार्टी में कोई दिख नहीं रहा. चुनाव में चिराग की क्या हालत हुई, वो किसी से छुपी नहीं रही. वो खुद अपनी जमीन गंवा बैठे हैं. सियासी पिच में चिराग के सामने घना अंधेरा है. ये अंधेरा बड़ा ही घना है क्योंकि राजनीति में संगठन के बिना कुछ नहीं होता.

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