मंगलवार, 11 अक्टूबर 2011

जग को जीत चला गया मुसाफिर



(होठों से छू लो तुम...बन जाओ मीत मेरे,मेरा प्रीत अमर कर दो)...
जगजीत सिंह...आज भले ही ये महान फनकार हमारे बीच नहीं है। लेकिन उनकी आवाज हमेशा कायनात में गूंजती रहेगी। गजल सम्राट जगजीत सिंह ने कम ही वक्त में लोगों के दिल में ऐसी जगह बना ली। जो उनके जाने के बाद भी कायम है। जग को जीत कर वो हमेशा के लिए अलविदा कह गए।किसी ने लिखा है कि मुसाफिर है ये जिंदगी, एक दिन आना और फिर एक दिन जाना भी है सबको...। इस शख्सियत के चले जाने से गजल अपने आप को तन्हा महसूस कर रही है और कह रही है...चिट्ठी न कोई संदेश...

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